अंधियारी रातों मे काले घोर अंधेरे छाये। मैंने अपने जीवन में कितने सन्नाटे है पाये अंधियारी रातों में घोर अंधेरे छाये जीवन एक रेत का सागर हाथ बढाओ छूटा जाये अंधियारी रातो में काले घोर अंधेरे छाये मैंने अपने जीवन में कितने सन्नाटे है पाये पुण्य पाप है क्या इस,जग में सब कर्मों का लेखा । और अंधेरी इस दुनिया में कितने सन्नाटे है छाये। रातों में काले घोर अंधेरे छाये्। मैंने अपने जीवन में कितने सन्नाटे है पाये